लिव इन रिलेशनशिप कानून: लिव इन में रहने वाली महिला के क्या अधिकार हैं?

live in relationship law In hindi: जब कोई अविवाहित जोड़ा लंबे समय तक एक साथ रहता है और उनके बीच बिलकुल शादी के जैसा रिश्ता होता है तो इससे लिव-इन रिलेशनशिप का नाम दिया जाता है यानी कि एक पुरुष और एक महिला बिना शादी के एक साथ रहते है। खास तौर पर महानगरीय शहरों में, इस तरह का रिश्ता ज्यादा देखने को मिलता है। क्योंकि इस तरह के रिश्ते में दोनों भागीदारों को शादी की तुलना में साथ रहना आसान होता है और उन्हें अपनी जिम्मेदारियां से भी मुक्ति मिलती है।

लेकिन अक्सर ऐसे अस्थाई रिश्तो में एक महिला असंतोष महसूस करती है और उन्हें अपने इस रिश्ते के बाद कई तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है इसलिए इस लेख में आज हम लिव-इन रिलेशनशिप में एक महिला के अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी साझा करेंगे ताकि आप लिव इन रिलेशनशिप कानून, लिव इन में रहने वाली महिला के क्या अधिकार हैं? के संबंध में बेहतर तरीके से जान सके। 

भारत में लिव-इन रिलेशनशिप कानूनी नही

कई लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या भारत में लिव-इन रिलेशनशिप कानूनी है? तो हम आपको बता दें कि भारत में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, इस्लामिक कानून और ईसाई पर्सनल लॉ के अंतर्गत लिव-इन रिलेशनशिप अधिनियम को मान्यता नहीं दी गई है। किंतु महिलाओं के शोषण की संभावना को देखते हुए कोर्ट के द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं के भरण-पोषण के कानूनी अधिकार प्रदान किए गए है। 

लिव इन रिलेशनशिप कानून

सुप्रीम कोर्ट (SC) 2015 को जारी लिए गए स्टेटमेंट के अनुसार अगर कोई अविवाहित जोड़ा लंबे समय तक एक साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है तो उन्हें विवाहित माना जाएगा और दोनो ही जोड़ो को समान अधिकार प्राप्त होंगे क्योंकि जब कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक एक साथ लगातार होते हैं तो समाज में उन्हें लेकर विभिन्न प्रकार की धारणाएं बनती हैं हालांकि इन धारणा को निर्विवाद साक्ष्य प्रस्तुत करके खंडित किया जा सकता है। 

लिव-इन रिलेशनशिप नियमों के बारे में कानून क्या कहता है?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लिव-इन रिलेशनशिप जैसे अस्थाई रिश्तों पर घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 2(f) लागू नहीं होती है। किसी रिश्ते में लिव-इन रिलेशनशिप के रूप में योग्य बनाने और इस धारा के तहत व्याख्या किए जाने के लिए कुछ आवश्यकताओं को पूरा किया जाना बेहाधी आवश्यक है, जैसे की- 

  • विवाह करने के लिए महिला के कानूनी आयु पूरी होने आवश्यक है। 
  • विवाह करने अथवा जीवनसाथी बनाने के उद्देश्य से एक साथ रहने वाले अविवाहित जोड़े। 
  • साथ ही साथ उन्हें कानून के द्वारा विवाह करने के लिए कई आवश्यक शर्तों को भी पूरा करना होगा। 
  • इसके अलावा लव इन रिलेशनशिप के नियम कानून कभी लागू होंगे जब वह काफी समय तक एक साथ रहे होंगे और अपनी मर्जी से एक दूसरे के साथ रह रहे होंगे

लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं के अधिकार

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा लिव-इन रिलेशनशिप मैं किसी पुरुष के साथ रहने वाली महिलाओं के लिए कुछ अधिकार प्रदान किए गए है। अगर आप भी जानना चाहते हैं की लिव इन में रहने वाली महिला के क्या अधिकार हैं? तो इसका पूरा विवरण निम्नलिखित प्रकार से नीचे उपलब्ध कराया गया है – 

भरण-पोषण का अधिकार

भारत सरकार के द्वारा साल 2003 में मलीमथ समिति की सिफारिशों के बाद आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 के अंतर्गत किसी के साथ रहने वाली महिलाओं को “पत्नी” की परिभाषा को संशोधित करने का निर्णय लिया गया था, जिसे यह सुनिश्चित किया गया था कि यदि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला अपना खुद का भरण पोषण करने में असमर्थ है।

यह रिश्ता खराब हो गया है तो उसकी वित्तीय जरूर को पुरुष के द्वारा पूरा किया जाएगा और अगर अविवाहित महिला के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार किया जाता है तो उसके साथ रिश्ते में रहने वाले व्यक्ति के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

संपत्ति अधिकार

लिव-इन रिश्तो में रहने वाली महिलाओं को 1956 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत महिलाओं को उसके साथ रहने वाला व्यक्ति घर पर रहने का अधिकार उन्हें विरासत में मिली और खुद से अर्जित संपत्ति, जिसमें उनका बेटा भी शामिल है आदि का अधिकार प्रदान करता है। 

यानी कि ऐसे अस्थाई रिश्तो में रहने वाली महिलाएं चाहे किसी भी परिस्थिति में हो या किसी की भी साथ रह रही हूं उनके जन्म के समय अपने माता-पिता की संपत्ति पर उनका पूरा अधिकार होगा और जो संपत्ति महिला ने खुद अर्जित की है उसे मलिक की इच्छा अनुसार विभाजित किया जाएगा।

बच्चों के लिए उत्तराधिकार के अधिकार

जैसा कि हमने आपको बताया कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक स्टेटमेंट में सुनिश्चित किया है कि अगर एक पुरुष और महिला लंबे समय तक एक साथ रहते हैं तो उन्हें विवाहित माना जाएगा और यदि इस बीच कोई बच्चा जन्म लेता है तो उसके साथ विद्या व्यवहार किया जाएगा।

और हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 16 के अंतर्गत बच्चों को अपने माता-पिता की स्वादिष्ट संपत्ति पर पूरा अधिकार मिलेगा। इसके अलावा बच्चा चाहे तो सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपना भरण पोषण का दावा भी कर सकता है भले ही लव इन रिलेशनशिप में रहने वाले माता-पिता साथ ना हो फिर भी उन्हें अपने बच्चों की देखभाल करनी होगी। 

बच्चों की हिरासत के अधिकार

जब लव इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुष और महिला एक दूसरे से अलग हो जाते हैं तो ऐसी स्थिति में बच्चों की कस्टडी एक बड़ा कारक बन जाती है क्योंकि अभी तक भारत सरकार के द्वारा लोगों रिलेशनशिप में पैदा हुए बच्चे की कस्टडी से जुड़े अधिकारों को नियंत्रित करने के लिए कोई विशेष कानून नहीं बनाया गया है इसलिए अदालतों के द्वारा ऐसी स्थितियों को विवाहित मामलों की तरह संभाला जाता है इसके बाद बच्चों के कल्याण और उसके भरण पोषण को ध्यान में रखते हुए कस्टडी किसे दी जाएगी यह बात निर्धारित की जाती है।

Love-in-Relationship Related FAQs

लिव इन रिलेशनशिप क्या होता है?

जब कोई पुरुष किसी महिला के साथ लंबे समय तक एक साथ रहता है जैसे कि शादीशुदा जुड़े रहते हैं तो इस तरह के रिश्ते को लव इन रिलेशनशिप का नाम दिया जाता है।

क्या भारत में अविवाहित दम्पतियों को अधिकार प्राप्त हैं?

जी हां भारत में अविवाहित दंपतियों को अधिकार प्राप्त हैं सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा समलैंगिक जोड़ों और अविवाहित जोड़े कानूनी संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक कल्याण कानून द्वारा प्रदत्त लबों को प्राप्त करने के हकदार बने गए है.

क्या मैं और मेरी गर्लफ्रेंड भारत में एक साथ रह सकते हैं?

जी हां आप अपनी गर्लफ्रेंड के साथ लविंग संबंध में रह सकते हैं जिसे स्वयं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वीकार किया गया है यानी कि भारत में दो बच्चों के एक साथ रहना अवैध या गैर कानूनी नहीं माना जाएगा।

क्या भारत में सार्वजनिक स्थान पर चुंबन करना गैरकानूनी है?

यदि सार्वजनिक स्थानों पर चुंबन करना देखने वालों को अश्लील लगता है तो यह गैर कानूनी माना जाएगा और यह भारतीय दंड संहिता की धारा 294 का उल्लंघन भी माना जाता है इसलिए सार्वजनिक स्थानों पर चुंबन करना गैरकानूनी है।

क्या किसी अविवाहित जोड़े का भारतीय होटल में ठहरना कानूनी है?

जी हां भारत में किसी भी होटल में अविवाहित जोड़ों का ठहरना कानूनी है हालांकि होटल मालिक या प्रबंधन अपने विवेक के अनुसार अविवाहित जोड़े को ठहरने की अनुमति दे सकता है।

निश्कर्ष

उम्मीद करते हैं कि आपके लिए हमारे इस आर्टिकल में लिव इन रिलेशनशिप कानून, लिव इन में रहने वाली महिला के क्या अधिकार हैं? के संबंध में बताई गई सभी जानकारी लाभकारी साबित रही होगी अगर यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित रहा हो तो कृपया करके इसे अन्य लोगों के साथ शेयर जरूर करें ताकि अधिक से अधिक लोग लव इन रिलेशनशिप के अधिकारों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें और ऐसी अनोखी जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी वेबसाइट बने रहिए।

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