आजकल महंगाई चरम पर है। ऐसे में कई बार लोग अतिरिक्त आय के लिए अपने मकान को किराए पर दे देते हैं। इससे उन्हें प्रतिमाह अपने खर्चों के निपटारे को कुछ राशि अलग से मिल जाती है, जिससे उन्हें बहुत सहायता मिल जाती है।

लेकिन समस्या तब खड़ी हो जाती है, जब किराएदार किराया नहीं देते। वे महीनों बगैर एक भी पैसा दिए मकान में बने रहते हैं।

कई मकान ही कब्जा लेते हैं। बहुत से मकान मालिकों को यह भी जानकारी नहीं होती कि यदि किराएदार किराया न दें तो क्या करें? यदि आप भी इन्हीं में से एक हैं तो आज की पोस्ट आपके लिए ही है।

दोस्तों, इससे पूर्व कि हम आगे बढ़े सबसे पहले यह पहले जान लेते हैं कि किराया (rent) कैसे तय होता है? आपको बता दें कि किराए की राशि मकान मालिक एवं किराएदार की आपसी रजामंदी (mutual consent) से तय होती है। इसके पश्चात मकान मालिक (land owner) एक 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट किराएदार के साथ करता है।

इसे दोनों के हस्ताक्षर (signature) के बाद रेंट अथारिटी (rent authority) को दो माह के भीतर सूचित (inform) करने एवं रजिस्टर्ड (registered) कराने का प्रावधान किया गया है, ताकि विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर इसके अनुसार कार्रवाई की जा सके।

इसमें किराए की राशि (rent amount) के साथ ही इसमें प्रतिवर्ष कितनी बढ़ोत्तरी होगी, यदि किराएदार किराया देने से मुकरता है तो मकान मालिक क्या कदम उठाएगा आदि इन सभी बातों का उल्लेख रहता है।

यदि किराएदार लगातार दो महीने तक किराया न दे तो आप उससे मकान खाली करा सकते हैं। माडल टेनेंसी एक्ट (model tenency act)-2021 यानी आदर्श किराएदारी अधिनियम-2021 के अनुसार किराएदार यदि मकान खाली करने से मुकरता है तो मकान मालिक इस मामले को रेंट कोर्ट (rent court) ले जा सकता है।

आदर्श किराएदारी अधिनियम यानी माडल टेनेंसी एक्ट (model tenency act) का प्रस्ताव केंद्र सरकार (Central Government) आज से लगभग तीन वर्ष पूर्व यानी सन् 2019 में लेकर आई थी। इसके बाद उसने इस संबंध में विभिन्न राज्यों से 31 अक्तूबर, 2020 तक पाॅलिसी डाक्यूटमेंट (policy document) पर सुझाव (suggestions) देने को कहा।

किराएदार किराया न दे तो क्या करें?  इसकी अधिक जानकारी के लिये नीचे लिंक पर क्लिक करें?